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ये थी वो बड़ी वजह जिसके चलते आज भी नहीं मिल पाई ‘चंगेज़ खान’ की कब्र, जानकर आप भी हैरान रह जाएँगे !

हमारे देश में ऐसे कई लोग हैं जो हमेशा ये चाहते हैं कि उनके मरने के बाद उनको सभी लोग दिल से याद करें. इतना तो हम सभी जानते हैं कि कभी ना कभी तो इंसान की मुत्यु होनी है. मनुष्य की लाख कोशिश  करने के बाद भी वह हमेशा जीवित नहीं रह सकता इसलिए उसको इस बात की हमेशा चिंता सताती है कि मरने के बाद उनको लोग याद करेंगे. खैर ये तो आम लोगों के मुत्यु की बात होगी. यदि हम बात करें इतिहास की तो दुनिया में जितने भी बड़े सुल्तान, महाराज, बादशाह जैसी महान हास्तियों के आज भी मकबरें यादगार के लिए बनाए हैं जिसके कारण उनको लोग आज भी याद करते हैं.

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आज अगर हम कहीं भी घूमने के लिए बाहर जाते हैं तो हमें अलग -अलग महान हास्तियों के बारें में अलग- अलग कहानी के किस्से सुनने को मिलते हैं. जिसके कारण लोगों के दिल में आज भी उनके लिए जगह है. इस बात से ये अंदाज लगाना कोई गलत बात नहीं है कि  जिन महान हास्तियों को आज भी याद करते हैं शायद उन्होंने कोई अच्छा काम किया होगा इसलिए उनके लिए आज भी लोगों के दिल में जगह है.

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चंगेज का जन्म

बता दें कि आज हम जिस शंहशाह की बात करे रहे हैं वो ना तो अकबर है ना तो सुल्तान बल्कि वो चंगेज खान हैं. चंगेज खान के बारे में भला कौन नहीं जानता होगा. चंगेज खान की एक आखिरी ख्याव्हिश थी कि उनके मरने के बाद लोग उनको कभी याद ना करें. चंगेज खान का जन्म 18 अगस्त 1162 में हुआ था. चंगेज खान एक शासक था जिन्होंने मंगोल साम्राज्य के विस्तार में भूमिका निभाई है. वह अपनी संगठन शाक्ति के लिए काफी फेमस रहे हैं. इससे पहले वो यायावर जाति यानि जो लोग भेड़ बकरियां पालते हैं.

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चंगेज खान ने मरने से पहले इस शख्स को बनाया था अपना उत्तराधिकारी

चंगेज खान ने कई पूर्वोत्तर एशिया के चरवाहों को एक साथ इकट्ठा करने के बाद सत्ता में आया और जब साम्राज्य की स्थापना हुई. उसने मंगोल पर आक्रमण करना शुरु कर दिया. इस आक्रामण में यूरेशिया ने जीत हासिल की और मंगोल साम्राज्य ने मध्य एशिया और चीन के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर कब्जा कर लिया. बता दें कि चंगेज ने अपनी मौत से पहले ओगदेई खान को अपना उत्तराधिकारी बनाया और अपने बेटे और पोते के बीच अपने साम्राज्य को बांट दिया. पश्चिमी जिया को हराने के बाद  सन 1227 में उसका निधन हो गया, लेकिन उनकी आखिरी इच्छा थी कि लोग उसे कभी याद ना करें और उसके लिए उसने मरने से पहले ही तैयारी कर ली थी.

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चंगेज की कब्र को ढूढने के लिए इन तरीकों का किया था इस्तेमाल

सबसे पहले बता दें कि चंगेज की मौत को लेकर सबसे दिलचस्प बात तो यह है  कि आजतक किसी को ये नहीं पता था कि आखिर चंगेज की क्रब कहा हैं ? चंगेज की कब्र ढूढने में सिर्फ देशवासियों को ही नहीं बल्कि विदेशियों को भी काफी इंटरेस्ट रहा था. इतना तो हम सभी जानते हैं कि चंगेज की कब्र को ढूढने के लिए अब तक के बड़े- बड़े मिशन चलाए गए थे. यहां तक नेशनल जियोग्राफी ने तो सैटेलाइट के द्वारा कब्र की तलाश की लेकिन परिणाम कुछ हासिल नहीं हुआ.

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ये समाज नहीं चाहता था चंगेज की कब्र ढूंढना

केवल एक ही मंगोलिया समाज था जो चंगेज की कब्र की तलाश नहीं करना चाहता था. वो इसलिए नहीं तलाश करना चाहता था क्योंकि मंगोलिया लोग अपने बुजुर्गों की बात का सम्मान उनके मरने के बाद भी रखते हैं. ये बात तो काफी हैरानी की है कि चंगेज मरने से पहले वसीयत की थी. इसी वसीयत के बदले वो नहीं चाहते थे कि उनके मरने के बाद कोई भी सुराख रह जाए. इसलिए उसने पहले ही अपने साथियों और सिपाहियों को अपनी वसीयत में कहा था कि उसके मरने के बाद उसे एक ऐसी जगह पर दफनाया जाए जहां कोई आता जाता ना हो और वो जगह गुमनाम हो. साथ ही कहा था कि उनको जिस जगह पर दफनाया जाएगा उसके बाद एक हजार घोड़ों पर दौड़ाकर ज़मीन को बराबर कर दिया जाए. जिससे कब्र पर कोई निशान बाकी ना रहें.

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चंगेज की कब्र को खोदने के पीछे बहुत बड़ा वहम

सूत्रों के अऩुसार ये कहा जाता है कि जिंगनू में राजाओं की कब्र जमीन में 20 मीटर खंडर में दफनाई जाती है. उस खंडर में कीमती चीजों को भी उनके साथ उस कमरे में दफना दिया जाता था. इसलिए माना जाता है कि चंगेज की मौत के बाद  इस तरह कब्र में दफनाया होगा. कहा जाता है कि मंगोलयां लोगों को चंगेज की कब्र को खोदने के पीछे बहुत बड़ा वहम और डर है. जिसके कारण चंगेज की कब्र की भी खुदाई की जाएगी तो दुनिया में एक बार फिर तबाही मच जाएगी.

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नई सरकार ने प्रोजेक्ट पर लगाई रोक

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बता दें कि 90 के दशक में जापान और मंगोलिया ने मिलकर चंगेज की कब्र खोजने के लिए एक ज्वाइंट प्रोजेक्ट शुरु किया गया था.  जिसका नाम गुरवान गोल था. इन दोनों देश के बीच इस प्रोजेक्ट के द्वारा चंगेज की जन्म भूमि को शोध करना शुरु कर दिया. इसी दौरान मंगोलिया और जापान में लड़ाई शुरु हो गई जिसके कारण कम्युनिस्ट शासन समाप्त हो गया और नई सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई. इसलिए आज तक किसी को नहीं पता की उनकी कब्र कहां हैं.

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